जो अनुभव मेरे हैं तुम्हारे कभी नहीं हो सकते जो सावन मेरे हैं तुम्हारे कभी नहीं हो सकते क्यूके उन्हे मैं कभी भी दुबारा महसूस कर सकता हूँ उसी सिहरन के साथ उन्ही धड़कन के साथ इसी तरह वो मेरे हैं उन्हे मैं चाह के भी किसी को नहीं दे सकता और वही तो मैं हूँ अगर जान सको मुझे तो बस सुन और समझ लेना बाकी का बाकी ही रहने देना वो बाकी ही मुझे अपने मे रखता है जब मैं उसमे से निकलता हूँ तो ही तुम्हें समझ आ सकता हूँ जितना नहीं समझ पाते हो मुझे वो बाकी बचा वही तो है जो मैं हूँ
फिर वो अंधकार है फिर वो विकार है रोकता है वो मुझे टोकता है वो मुझे अयोग्य वो बनाता है विश्वास को हिलाता है मजबूरी वो समझाता है के पहुँच नहीं पाएगा तू रुक जा समझ जा नासमझी मुझे मंजूर के खत्म हो जाऊँ जरूर रुकना नहीं मंजूर ये तर्कहीन पुकार है जो आती बार बार है सिर्फ तू इतना बेकार है सिर्फ तू इतना बेकार है
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